ആജ് കാ ശബ്ദ് അവഗാമൻ മുകുത് ബിഹാരി സരോജ് മികച്ച കവിത രത്ഭർ പാനി ബരസ്ത ഔർ സാരെ ദിന് അംഗരേ

                
                                                                                 
                            'हिंदी हैं हम' शब्द क्षृंखला में आज का शब्द है- आवागमन, जिसका अर्थ है- आना-जान, बार-बार मरना और जन्म लेना। प्रस्तुत है मुकुट बिहारी सरोज की रचना- रात भर पानी बरसता और सारे दिन अंगारे 
                                                                                                
                                                     
                            

रात भर पानी बरसता और सारे दिन अंगारे ।
अब तुम्ही बोलो कि कोई ज़िंदगी कैसे गुज़ारे ?

बेवज़ह सब लोग भागे जा रहे हैं,
देखने में ख़ूब आगे जा रहे हैं,
किन्तु मैले हैं बहुत अंतःकरण से,
मूलतः बदले हुए हैं आचरण से,
रह गए हैं बात वाले लोग थोड़े,
और अब तूफ़ान का मुँह कौन मोडे,
नाव डाँवाडोल है ऐसी कि कोई क्या उबारे,
जब डुबाने पर तुले ही हो किनारे पर किनारे ।

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2 മിനിറ്റ് മുമ്പ്

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