'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- गाढ़ा, जिसका अर्थ है- जिसमें जल के साथ कोई चूर्ण मिला हो, घना, ठस, मोटा। प्रस्तुत है यश मालवीय की रचना- दबे पैरों से उजाला आ रहा है
दबे पैरों से उजाला आ रहा है
फिर कथाओं को खँगाला जा रहा है
धुंध से चेहरा निकलता दिख रहा है
कौन क्षितिजों पर सवेरा लिख रहा है
चुप्पियाँ हैं जुबाँ बनकर फूटने को
दिलों में गुस्सा उबाला जा रहा है
दूर तक औ' देर तक सोचें भला क्या
देखना है बस फिजाँ में है घुला क्या
हवा में उछले सिरों के बीच ही अब
सच शगूफे सा उछाला जा रहा है
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