'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- करवट, जिसका अर्थ है- हाथ या पार्श्व के बल लेटने की स्थिति या मुद्रा। प्रस्तुत है धर्मवीर भारती की रचना- गुनाह का गीत
इन फ़ीरोज़ी होंठों पर बर्बाद
मेरी ज़िंदगी!
गुलाबी पाँखुरी पर एक हल्की सुरमई आभा
कि ज्यों करवट बदल लेती कभी बरसात की दुपहर!
इन फ़ीरोज़ी होंठों पर!
तुम्हारे स्पर्श की बादल-घुली कचनार नरमाई!
तुम्हारे वक्ष की जादूभरी मदहोश गरमाई!
तुम्हारी चितवनों में नरगिसों की पात शरमाई!
किसी भी मोल पर मैं आज अपने को लुटा सकता
सिखाने को कहा मुझसे प्रणय के देवताओं ने
तुम्हें आदिम गुनाहों का अजब-सा इंद्रधनुषी स्वाद!
मेरी ज़िंदगी बर्बाद!
इन फ़ीरोज़ी होठों पर मेरी ज़िंदगी बर्बाद!
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